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तीन भाषा नीति पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा सवाल, अंग्रेजी को लेकर भी CBSE से कही अहम बात

 Reported By: Atul Bhatia Written By: Vineet Kumar Singh
 Published : Aug 20, 2026 05:51 pm IST,  Updated : Aug 20, 2026 05:51 pm IST

सुप्रीम कोर्ट ने CBSE की तीन भाषा नीति पर पुनर्विचार की जरूरत बताई और कक्षा 6 के छात्रों को राहत देने की संभावना तलाशने को कहा है। कोर्ट ने अंग्रेजी को ‘नॉन-नेटिव’ भाषा मानने तथा ‘नेटिव’ शब्द के औपनिवेशिक भाव पर सवाल उठाए हैं।

CBSE Three Language Policy, Supreme Court on Three Language Formula- India TV Hindi
सुप्रीम कोर्ट ने तीन भाषा नीति पर अहम टिप्पणी की है। Image Source : PTI FILE

Highlights

  • सुप्रीम कोर्ट ने CBSE से तीन भाषा नीति पर दोबारा विचार करने को कहा।
  • कोर्ट ने कक्षा 6 के छात्रों को राहत देने की संभावना तलाशने का सुझाव दिया।
  • अंग्रेजी को गैर-देशज भाषा मानने पर भी सुप्रीम कोर्ट ने सवाल उठाए।

नई दिल्ली: केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड यानी कि CBSE की तीन भाषा नीति को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को महत्वपूर्ण टिप्पणी की है। कोर्ट ने CBSE से इस नीति पर दोबारा विचार करने को कहा और कक्षा 6 के छात्रों को कुछ राहत देने की संभावना तलाशने का सुझाव दिया। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने अंग्रेजी को गैर-मूल या 'नॉन नेटिव' भाषा मानने पर भी सवाल उठाए। जस्टिस जॉयमाल्य बागची ने कहा कि ‘नेटिव’ यानी ‘मूल निवासी’ शब्द के इस्तेमाल को लेकर भी उन्हें गंभीर आपत्ति है, क्योंकि इसमें औपनिवेशिक सोच की झलक मिलती है। उनके मुताबिक इसके बजाय ‘इंडिजिनस’ यानी ‘देशज’ या ‘स्वदेशी’ शब्द का इस्तेमाल किया जाना चाहिए।

जस्टिस बागची ने 'नेटिव' शब्द पर जताई आपत्ति

जस्टिस बागची ने अपनी टिप्पणी में कहा कि भारत में अंग्रेजी की ऐतिहासिक मौजूदगी और समाज में उसकी गहरी जड़ों को भी ध्यान में रखना होगा। उन्होंने कहा,

'हमें यह देखना होगा कि अंग्रेजी को किस हद तक गैर-देशज भाषा माना जा सकता है। मुझे व्यक्तिगत रूप से ‘नेटिव’ शब्द को लेकर गंभीर आपत्ति है। इसमें औपनिवेशिक भाव है। इसके बजाय ‘इंडिजिनस’ शब्द होना चाहिए। अंग्रेजी के भारत में ऐतिहासिक विकास और भारतीय समाज में उसकी जड़ों को देखते हुए हमें इस पर अंतिम फैसला लेना होगा। हालांकि नीति बनाना आपका अधिकार है, लेकिन संवैधानिक दृष्टि से यह देखना होगा कि अंग्रेजी गैर-देशज भाषा है या देशज। ऐसा करने से मौजूदा व्यवस्था की कई खामियां दूर हो सकती हैं।'

तीसरी भाषा लागू करने में स्कूलों के सामने बड़ी चुनौतियां

तीन भाषा व्यवस्था के तहत कक्षा 6 से तीसरी भाषा पढ़ाने की व्यवस्था को लेकर पहले से ही सवाल उठते रहे हैं। संसद की एक समिति ने भी इस व्यवस्था में कई कमियां बताते हुए कहा है कि स्कूलों को तीसरी भाषा लागू करने के लिए पर्याप्त समय नहीं दिया गया। सबसे बड़ी दिक्कत भाषा शिक्षकों की भर्ती, पढ़ाई की सामग्री उपलब्ध कराने और शिक्षकों को प्रशिक्षण देने को लेकर सामने आई है। लोकसभा में 2026-27 के लिए अनुमानों पर पेश की गई समिति की दसवीं रिपोर्ट में CBSE और देश में सस्ती व गुणवत्तापूर्ण शिक्षा से जुड़े बजट और नीतिगत पहलुओं की समीक्षा की गई है।

सरकार ने तीन भाषा फॉर्मूले में किए ढांचागत बदलाव

रिपोर्ट के मुताबिक, शिक्षा मंत्रालय ने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के साथ मिलकर तीन भाषा फॉर्मूले में ढांचागत बदलाव किए हैं। इसके तहत नया R1, R2, R3 भाषा ढांचा भी तैयार किया गया है। समिति ने माना कि मंत्रालय ने इस दिशा में महत्वपूर्ण प्रगति की है। गणित, विज्ञान और सामाजिक विज्ञान जैसे विषयों की किताबों का 22 अनुसूचित भाषाओं में अनुवाद किया गया है। इसके अलावा अलग-अलग भाषाओं में पढ़ाई के बीच बदलाव को आसान बनाने के लिए ब्रिज कोर्स और ई-कंटेंट भी तैयार किए गए हैं।

सरकार ने मुश्किलें आसान करने के लिए उठाए कदम

मंत्रालय ने बच्चों की शुरुआती पढ़ाई को आसान और रोचक बनाने के लिए ‘जादुई पिटारा’ जैसे खेल आधारित लर्निंग किट भी तैयार किए हैं। ये किट 22 भाषाओं में उपलब्ध कराए गए हैं। इसके साथ ही देशभर में भाषाओं से परिचय कराने के लिए ‘भाषा संगम’ कार्यक्रम चलाया गया है। केंद्रीय भारतीय भाषा संस्थान (CIIL) के साथ मिलकर 121 मातृभाषा प्राइमर भी तैयार किए गए हैं। केंद्रीय विद्यालयों जैसे संस्थानों में स्थानीय भाषाओं की पढ़ाई के लिए संविदा पर स्थानीय भाषा शिक्षकों की नियुक्ति कर शैक्षणिक मदद देने की व्यवस्था भी की गई है।

छात्रों को राहत मिलने की संभावना पर टिकीं नजरें

समिति ने यह भी माना कि तीसरी भाषा लागू करने से पहले स्कूलों की वास्तविक जरूरतों का पर्याप्त अनुमान नहीं लगाया गया। खासतौर पर पढ़ाई की सामग्री, शिक्षक प्रशिक्षण और भाषा शिक्षकों की उपलब्धता जैसी जरूरतों पर पहले से पर्याप्त तैयारी नहीं हो सकी। यही वजह है कि कक्षा 6 से तीसरी भाषा लागू करने को लेकर स्कूलों और छात्रों के सामने व्यावहारिक परेशानियां पैदा हो रही हैं। अब सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी के बाद CBSE की तीन भाषा नीति में बदलाव या कक्षा 6 के छात्रों को राहत मिलने की संभावना पर नजरें टिकी हैं।

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